
फतेहपुर। सरकारी स्कूलों की दशा किसी से छिपी नहीं है। एक तरफ जहां गांव मजरों के बच्चों को स्कूल लाने के लिए लाख जद्दोजहद करनी पड़ती है। खेत खलिहानों में शिक्षक बच्चों को तलाशते घूमते हैं। तब जाकर कहीं बच्चों का स्कूल जाना होता है। अब लॉकडाउन के समय जब शिक्षक बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा देने की बात कर रहे हैं। तो इसके लिए बिना तैयारियों के सेना मैदान में उतार देने जैसी बात है।
ऑनलाइन पढ़ाई के लिए अधूरी तैयारी और संसाधनों का अभाव बेसिक शिक्षा परिषद व माध्यमिक शिक्षा परिषद के लिए कड़ी चुनौती बना हुआ है। शासन के निर्देश पर जिले में बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा दी जा रही है। ऐसे में किसी गांव में नेटवर्क की दिक्कत है तो किसी के सामने स्मार्टफोन न होना परेशानी बना हुआ है। कोरोना वायरस की वजह से लाॅक डाउन में स्कूल और कॉलेज बंद है।
शिक्षा विभाग इन हालातों के बीच ऑनलाइन पढ़ाई कराने का प्रयास कर रहा है। इसमें अभी भी कई दिक्कतें आ रही हैं। कई विद्यालयों और उनके अभिभावकों के पास अभी भी स्मार्टफोन नहीं है। ऐसे में छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ऑनलाइन पढ़ाई में बेसिक शिक्षा परिषद व माध्यमिक शिक्षा परिषद पिछड़ा हुआ है। अधिकांश लोगों के पास के स्मार्टफोन का ना होना व जिनके पास है उनके मोबाइल में नेटवर्क की धीमी रफ्तार और नेटवर्क न आना सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है। स्मार्टफोन न होने के कारण गरीब परिवारों के बच्चे ऑनलाइन शिक्षा नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं।
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