उपमुख्यमंत्री ने दिया सुझाव- इंटरनल एग्जाम के आधार पर ही बच्चों को पास किया जाए

नई दिल्ली। ऑनलाइन शिक्षा, एकडेमिक कैलेंडर इत्यादि जैसे शिक्षा के कुछ प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा करने के लिए मंगलवार को केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने देश के सभी शिक्षा मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करके मीटिंग की। बैठक में शामिल हुए दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कुछ अहम मुद्दों पर बल दिया।

सिसोदिया ने कहा कि सीबीएसई की 10वीं व 12वीं की बची हुई परीक्षाएंं कराना अभी सम्भव नहीं होगा, इसलिए इंटरनल एग्जाम के आधार पर ही बच्चों को पास किया जाए जैसा कि 9 वीं और 11वीं के बच्चों को पास किया गया है। 

मनीष सिसोदिया ने कहा कि आज नहीं तो कल हम कोरोना के संकट से बाहर निकल ही जाएंंगे लेकिन इसका शिक्षा और अर्थव्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव होगा। इसलिए हम सब शिक्षा मंत्रियों की ज़िम्मेदारी बनती है कि इससे कम से कम नुक़सान हो, इसके लिए हम अभी से तैयार रहें। बैठक में मनीष सिसोदिया ने कई अहम सुझाव भी दिए। 

उन्होंने कहा कि जिस तरह 9वीं और 11वीं कक्षा के छात्रों को आंतरिक मूल्यांकन और घरेलू परीक्षा के आधार पर बच्चों को मार्क्स देने का निर्णय लिया गया है, उसी तरह का फैसला 10वीं और 12वीं के बच्चों के लिए भी लिया जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि निकट भविष्य में भी सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से बची हुई परीक्षाएं कराना संभव नहीं होगा। इसलिए इस मुद्द्दे पर अनिश्चितता ख़त्म करते हुए तुरंत निर्णय लेने चाहिए। दिल्ली देश का एकमात्र ऎसा प्रदेश है, जिसका अपना बोर्ड नहीं है। लिहाज़ा सीबीएसई ही उसका बोर्ड है। अतः सीबीएसई को दिल्ली के सुझाव पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि आईआईटी, नीट यूनिवर्सिटी प्रवेश जैसी सभी परीक्षाएं कराना आगे भी मुश्किल होगा। बच्चों का वर्ष ख़राब ना हो, उन्हें तनाव न हो, उसके लिए 12वीं के छात्रों को उनके मार्क्स पर इस साल मेरिट के हिसाब से एडमिशन दिए जाएंं। एक और सुझाव में उन्होंने कहा कि इस साल के सीबीएसई व एनसीईआरटी के सिलेबस में 30% की कटौती की जाए और अगले साल के सीबीएसई बोर्ड एग्ज़ाम, आईआईटी जेईई, नीट यूनिवर्सिटी भी उसी हिसाब से हों। 

कोरोना के दौर में दिल्ली में टेक्नॉलजी के माध्यम से बच्चों तक शिक्षा पहुंंचाने के प्रयासों के बारे में उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि बहुत से बच्चों के घर में स्मार्टफ़ोन नहीं होते। दिल्ली में भी 68% बच्चों के पास अभी स्मार्टफ़ोन इसलिए हैं क्योंकि उनके माता-पिता घर पर हैं। शिक्षा मंत्री ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो पर दिल्ली सरकार को समय दिया जाए जिससे दिल्ली के सरकारी स्कूलों के टीचर एलेमेंटरी, सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी शिक्षा की इंटरैक्टिव कक्षाएं लें और बच्चे उसी पढ़ाई योजना के आधार पर पढ़ाई कर सकें जो उनके स्कूल में फ़ॉलो किया जाता है।

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