लॉक डाउन के दौरान छात्रों के लिए वरदान साबित हो रहा इंटरनेट, छात्र ले रहे हैं ई शिक्षा का लाभ

हुगली। कोरोना के कारण एक तरफ जहां एक के बाद एक लोग अपनी जान गंवा रहे रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ पूरा विश्व आर्थिक रूप से पिछड़ता चला जा रहा है।  कोरोना के कारण देश में  शिक्षा का क्षेत्र बुरी तरह से प्रभावित  हो रहा है। क्योंकि लॉक डाउन के पहले ही देश में शिक्षण संस्थानों को बंद कर दिया गया एवं लॉक डाउन समाप्त होने के तत्काल बाद भी शिक्षण संस्थानों को खोले जाने की उम्मीद नहीं है। इस बीच छात्र छात्राओं के लिए इंटरनेट संजीवनी बूटी बनकर उभरा है। 

सरकार भी इंटरनेट के माध्यम से शिक्षण संस्थानों को शिक्षा देने का निर्देश दे चुकी है। कई शिक्षण संस्थानों ने इस पर अमल भी करना शुरू कर दिया है। हालांकि सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रविवार तक राज्य के सरकारी विद्यालयों में इंटरनेट के माध्यम से शिक्षा देने का राज्य सरकार का आदेश नहीं पहुंचा था। लेकिन निजी शिक्षण संस्थानों ने व्हाट्सएप, यूट्यूब, फेसबुक, ज़ूम जैसे विभिन्न एप्लीकेशंस के माध्यम से बच्चों को शिक्षा देने का काम शुरू कर दिया है।

हुगली जिले के श्रीरामपुर में स्थित गोस्पेल होम स्कूल के शिक्षक आजकल व्हाट्सएप के माध्यम से ही अपने छात्र छात्राओं को शिक्षा दे रहे हैं तो वही नारायणा ग्रुप के स्कूल जूम ऐप के माध्यम से अपने छात्र छात्राओं के साथ जुड़े हुए हैं। इसके अलावा रिसड़ा वाणी भारती स्कूल भी व्हाट्सएप का प्रयोग कर अपने छात्र-छात्राओं को नियमित पठन-पाठन से जोड़े रख रहा है। 

रिसड़ा संस्कार भारती स्कूल के प्रधानाचार्य रंजन श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने अलग-अलग कक्षाओं के लिए अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुप बनाए हैं और उनमें छात्र-छात्राओं को जोड़ दिया गया है। इसी के माध्यम से आजकल बच्चों की पढ़ाई लिखाई चल रही है। व्हाट्सएप के माध्यम से ही उन्हें होमवर्क दिया जा रहा है और उनका होमवर्क जांचा भी जा रहा है। समस्या होने पर वॉइस मैसेज भेज कर बच्चों को शिक्षक पठन सामग्री के विषय में समझा भी रहे हैं। अन्य कई निजी स्कूल भी फिलहाल इसी रास्ते पर चल रहे हैं। जब तक सरकार स्कूलों को खोलने का निर्देश नहीं देती तब तक इंटरनेट के माध्यम से बच्चों का पठन-पाठन जारी रहेगा। 

शिक्षा के लिए इंटरनेट का प्रयोग करने में कोचिंग सेंटरों के संचालक भी पीछे नहीं है। रिसड़ा स्थित साइंस कोचिंग सेंटर के संचालक अरविंद साह ने बताया की वे भी व्हाट्सएप के माध्यम से ही अपने कोचिंग सेंटर में आने वाले छात्र छात्राओं को पठन-पाठन की सामग्री उपलब्ध करवा रहे हैं। उन्होंने भी अलग-अलग कक्षाओं के लिए अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुप बनाए हैं। इसके अलावा जीत एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक जितेंद्र यादव उर्फ जीत सर ने कहा कि वे अपने पठन सामग्री के वीडियो बनाकर उसे यूट्यूब पर अपलोड कर रहे हैं। जिससे उनकी छात्र- छात्र-छात्राओं को इसका लाभ मिले। जीत एजुकेशन के नाम से एक ऐप भी बनाया गया है जो प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। छात्र-छात्राएं इस ऐप को अपने एंड्रॉयड फोन में डाउनलोड कर पठन सामग्री प्राप्त कर रहे हैं। इसके अलावा जीत एजुकेशन की वेबसाइट पर भी जाकर संस्थान के नोट्स को प्राप्त किया जा सकता है। जिले के कई अन्य कोचिंग संचालक भी ऐसा ही करने की योजना बना रहे हैं। 

वहीं अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा की यह पद्धति बिल्कुल नई है। वर्तमान समय में बच्चों को पठन-पाठन के साथ जोड़े रखने के लिए इंटरनेट  वरदान साबित हो रहा है। स्कूलों के बंद होने के बाद बच्चों की शिक्षा को लेकर  अभिभावक बहुत चिंता में थे परंतु इंटरनेट ने एक आशा की किरण दिखाई है। फिलहाल बच्चों को पठन-पाठन से जोड़े रखने के लिए इंटरनेट से बेहतर कोई विकल्प नहीं है।



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